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लापता गोल्ड मेडलिस्ट बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराने आधा दर्जन थानों में भटका पिता
उज्जैन।30 जनवरी को पिता, भाई के साथ जयपुर से भगत की कोठी एक्सप्रेस में यात्रा कर रही युवती उज्जैन स्टेशन पर ट्रेन रुकने के बाद कहीं चली गई। पिता व भाई आरपीएफ पहुंचे और सीसीटीवी कैमरे देखे जिसमें युवती प्लेटफार्म से जाते दिख रही थी। जीआरपी पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें मामला दूसरे थाने का होने की बात कहकर रवाना कर दिया। 20 दिन तक बेटी की गुमशुदगी लिखाने के लिये पिता आधा दर्जन थानों के चक्कर लगा चुका लेकिन अब तक फरियाद नहीं सुनी। उसका कहना था कि आज बेटी की गुमशुदगी नहीं लिखी तो एसपी से मिलकर शिकायत करूंगा।
बसंत कुमार निवासी लोपा सिवनी की बेटी सोनम (22 वर्ष) बीएससी गोल्डन मेडलिस्ट होने के बाद जबलपुर के कॉलेज में एमएससी कर रही थी। वह सहेलियों के साथ राजस्थान के फालना स्थित आईएफसीसी कंपनी में नौकरी के लिये गई। जहां से 30 जनवरी को बसंत अपने भांजे वीरेन्द्र ठाकुर, दोस्त संतोष साहू के साथ बेटी सोनम को भगत की कोठी एक्सप्रेस से लेकर इटारसी के लिये रवाना हुआ। ट्रेन उज्जैन प्लेटफार्म पर रुकी। यहां सोनम बिना बताये ट्रेन से उतर गई। उसकी तलाश लेकिन वह नहीं मिली।
किसी ने मदद नहीं की, अब कहां जाऊं
बेटी के जाने के बाद आरपीएफ में गया। जहां सीसीटीवी फुटेज देखे, जिसमें सोनम अकेले माधव नगर प्लेटफार्म की तरफ जाते दिखी। उसकी गुमशुदगी लिखाने जीआरपी गया तो पुलिस वालों ने कहा मामला नीलगंगा थाने का है। नीलगंगा थाने गया तो वहां पुलिस वालों ने कहा कि लड़की प्लेटफार्म से लापता हुई है इसलिये जीआरपी जाओ या देवासगेट थाने में रिपोर्ट लिखाओ। देवासगेट थाने गया तो जवाब मिला कि मामला हमारे थाना क्षेत्र का नहीं है।
कोई मदद नहीं मिली तो घर लौट गया। गांव की चौकी पर जाकर शिकायत की तो वहां से भी जवाब मिला कि जीआरपी में शिकायत करो। 20 दिन हो गये बेटी को तलाशते और पुलिस से मदद मांगते हुए लेकिन अब तक किसी ने मदद नहीं की। अब कहां जाऊं, किससे शिकायत करूं कुछ समझ नहीं आ रहा। अब वापस जीआरपी में बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराने आया हूं। जैसा कि पिता बसंत कुमार ने बताया